गलियारा

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Description

कोई भी कार्य एक अके ला ईन्सान नही कर सकता। हर किसी को आतर ं िक मनोबल के साथ
कोई ना कोई बाह्य परिबलो की आवश्यकता होती है, जिसके सहारे पर उसे अपनी मेजिल तक
जाने का हौसला मिल सके । ऐसा ही कुछ हम सबके साथ हुआ है ईस 2020 के साल मे। साल की
शरूआत
ु से ही हमने अपने देश और विदेश की बडी बडी हस्तियो को खोना शरू कर
ु दिया था औऱ

मार आते आते तो कोरोना का कहर ईतना बढ ग ्च या के हम मे से बहु

त से लोगोने अपने परिवारजनो

तक को खो दिया । ईस प्रस्तावना को लिखते बक्त मै खद कु ्वोरं

टाईन हुआ हू पर ईन ं चौदह दिनो मे

मैने अपने आप को जरा भी मायसू महससू नही होने दिया, कारण है यह पस्तु क ।
जी हा, दोस्तो… हमने ईस पस्तु क का काम कोरोना के शरूआती दौर
ु से शरू कर
ु दिया था,
ईस उद्शदे्य से कि हर लिखनेवाला शख्स अपने आप को व्यस्त तो रक्खे ही, साथ ही साथ जब
ईसका कार्य सं
पन्न हो जाये तब ईसको पढनेवाला वाचक भी खद को तरोतो

ु जा और हकारात्मक
महससू करे। ईस भगीरथ कार्य मे जिसने सबसे ज्यादा सहकार दिया है, वे है हमारे सभी लेखक मित्र,
जिन्होने ईस साहित्य सं

ग्रह मे अपनी लेखनी द्वारा विशिष्ट योगदान दिया। मै आभारी हू उन ं सभी

मित्रो का, जो समस्त भारतवर्षसे हमारे साथ जडे ह ु ु
ए है।

चेतना भाटियाजी और शमीम मरन्च्ट, जो महाराष्ट्र से हमे सहकार देते रहे। गजुरात से ध्व
रु

पटेल, किंजल पटेल, देवम सं

घवी, हितेश बद्धदेव, हा ु र्दिक मकवाणा और पजूा पटेल का योगदान

भी महत्वपर्ण
ू रहा । वेदिका, जो कि सारे प्रमोशन सं
बं
धित कार्य सं
भालती है, उसका भी उम्दा
योगदान है। मेरी कोर टीम, जो बिना दिन रात देखे काम करती रही है, उन्ही की वजह से आज यह
कार्य सं
पर्ण
ू हुआ है और एक पस्तु क के रूप मे आपके हाथो मे है। पस्तु क पसं

द आना या ना आना
यह आपकी अगत ं सोच हो सकती है पर ईन सभी लेखक मित्रो और योगदान देनेवाले मित्रो के
लिए दिल से दआ
ु जरूर करना।
हमने सं
पर्ण
ू प्रयास किया है कि ईस पस्तु क मे लिखे गये सभी सविचु ार एवं
क्वोट सभी
लेखको द्वारा स्वलिखित हो। आशा है कि हमारी यह छोटी सी कोशिश आप सबको पसं
द आये

और आप के जीवन में एक नयी उर्जा प्रदान करे।
जय अबे ं

लि.
आदित शाह “अंजाम”
स्थापक, हार्ट ओफ लिटरेचर

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